Friday, 17 November 2017

तुम होकर भी नहीं हो


मैं जानती हूँ इन रास्तों पर तुम्हारा होना तो दूर 
निशाँ मिलना भी मुश्किल है 
पर तकती रहती हूँ एकटक उसी तरफ 
शायद तुम आ जाओगे इस भ्रम में हूँ
ये खुशफहमी नहीं हो सकती 
क्योंकि सत्य जानती हूँ मैं 
तुम किसी अलग राह पर निकल पड़े हो 
पर ये मेरी इबादत है जो ईश्वर की तरह तुम पर यकीन करती है
सब जानते हैं कि ईश्वर मिलते नहीं 
पर लोग उनकी राह देखा करते हैं 
अपनी पीड़ा को उनसे कहकर जी लिया करते हैं 
वो पीड़ा कम नहीं होती, न ही ईश्वर अपनी गोद में बिठाकर 
हमें लाड़ करता है, न ज़िद पूरी करता है
बस उस पर भरोसा ही हमें सम्बल देता है कि कोई तो अपना है 
उसी तरह मैं जानती हूँ तुम होकर भी नहीं हो 
बस तुम समझ लेना कि तुम ईश्वर को कैसे-कैसे याद करते हो 
कैसे-कैसे उसकी राह तकते हो, उसके होने से ही कितना सुकून मिलता है 
शायद इस दिल के निश्छल प्रेम को समझ जाओगे

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