Thursday, 4 September 2014

वो...



दर्द-ए-दिल हर सुबह हर शाम दे गया
वो चंद मुलाकातों में अपना नाम दे गया

हम तो थे बेफिकर मौजों में थी नजर
मुस्कुराकर मुहब्बत का इंतकाम ले गया

कल तक हो जो भी चाहत अब वो ही रह गया
मेरी हसरतों को इश्क का गुलाम कर गया

बसने लगा है आज धड़कनों की जगह वो
जीने की वजह मुझको वो तमाम दे गया

34 comments:

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    1. धन्यवाद आशीष जी,
      सादर

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  2. बहुत खूब स्मिता जी


    सादर

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    1. धन्यवाद यश जी, काफी समय बाद फुर्सत मिली है हमे भी तो कुछ पंक्तिया लिख दी

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  3. दर्द-ए-दिल हर सुबह हर शाम दे गया
    वो चंद मुलाकातों में अपना नाम दे गया
    वाह... बहुत बढ़िया

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    1. धन्यवाह अनुषा

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  4. Replies
    1. धन्यवाद् राजीव जी।

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  5. कल 07/सितंबर/2014 को आपकी पोस्ट का लिंक होगा http://nayi-purani-halchal.blogspot.in पर
    धन्यवाद !

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    1. आभारी हु यश जी

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  6. रचना सुन्दर है |बधाई |

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  7. बहुत अच्छी रचना, स्मिता जी। बधाई।

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  8. स्मिता जी
    आज पहली बार आप की कवितायें पढ़ रही हूँ, दिल को छूतीं कवितायें।
    आप के ब्लॉग पर आना इस लिए हुआ कि मेरे पास आप का ई मेल आई डी नहीं है, इसी लिए यहां संदेश लिख रही हूँ।
    कुछ दिन पहले(7 जुलाई को ) आप ने मेरे लिए एक प्रश्नावली भरी थी ब्लॉगर्स और नॉनब्लागर्स से संबधित जो मैं ने अपनी शोध कार्य हेतु बनायी है। मैं बहुत आभारी हूँ आप की कि आप ने उसे भरने के लिए मेरे लिए समय निकाला। लेकिन स्मिता जी वो प्रश्नावली अधूरी भरी हुई है इस लिए मैं उसका उपयोग नहीं कर पा रही और आप जैसी संवेदनशील और जहीन ब्लॉगर की प्रतिक्रिया जानना मेरे लिए बहुत मायने रखता है । मेरी आप से विनती है कि आप एक बार उसे फ़िर से भर दें और अंतिम प्रश्न तक सब प्रश्नों का उत्तर दें, अति कृपा होगी। मैं उस प्रश्नावली का लिंक यहां एक बार फ़िर से दे रही हूँ आशा है आप निराश नहीं करेगीं।

    https://www.surveymonkey.com/s/FPMH5CS

    धन्यवाद
    सादर
    अनीता कुमार

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    1. maine apka survey complete kar dia hai madam...

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  9. वाह...सुन्दर पोस्ट...
    समस्त ब्लॉगर मित्रों को हिन्दी दिवस की शुभकामनाएं...
    नयी पोस्ट@हिन्दी
    और@जब भी सोचूँ अच्छा सोचूँ

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    1. आभार,,, हिन्दी दिवस की शुभकामनाएं...

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  10. स्नेह में सींची हुई सुन्दर रचना.

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  11. बहुत भावपूर्ण शायराना रचना
    स्वयं शून्य

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  12. बसने लगा है आज धड़कनों की जगह वो
    जीने की वजह मुझको वो तमाम दे गया ..

    वाह ... भावपूर्ण और प्रेम के एहसास से सरोबर है ये रचना ...

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  13. .शब्दों को चुन-चुन कर तराशा है आपने ...प्रशंसनीय रचना।

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  14. नई पोस्ट पर आपका स्वागत है

    उनकी ख्वाहिश थी उन्हें माँ कहने वाले ढेर सारे होते
    http://sanjaybhaskar.blogspot.in/2014/09/blog-post_28.html

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  15. बसने लगा है आज धड़कनों की जगह वो

    जीने की वजह मुझको वो तमाम दे गया
    बेहद दिलकश,,,

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  16. ग़ज़ल का हर शेर बेहतरीन।
    rajeshkavya.blogspot.com पर आप का स्वागत है।

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  17. अच्छा है शब्दों का चयन , कविता अच्छी लगी

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