Sunday, 3 August 2014

तेरे लिए




तेरे साथ हमकदम थे, तेरे लिए सनम थे
तुझसे थी मेरी हस्ती, तेरे बिना ना हम थे

तेरे साथ ही चले हम, तेरे लिए ठहर गए
दिल में कसक लिए हम बेसाख्ता बिखर गए

कहते थे तेरा जाना जाएगा, जाएगा भूल दिल ये
तूं दूर हो भले ही, तेरी याद में संवर गए

इश्क का गुबार-ए-ख्वाब था, कल था अभी नहीं है
तुम भी कहीं थे टूटे, हम भी कहीं बिखर गए

तेरा अक्स तैरता है, आंखों में दर्द बनकर
तेरे लिए थे जिंदा, तेरे लिए ही मर गए



71 comments:

  1. प्रेम की पीड़ा एवं बिछोह की वेदना का संक्षेप में वर्णन ! बहुत ही सुंदर

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    1. बहुत बहुत आभार देवेंन जी।

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  2. बहुत सुंदर रचना.
    दर्द कहीं आँखों में नमीं बनकर न छाए .....इसलिए......
    जो दिल में है उसे आँखों के हवाले नहीं करना
    खुद को कभी ख्वाबों के हवाले नहीं करना
    अब अपने ही ठिकाने पर रहता नहीं कोई
    पैगाम परिंदों के हवाले नहीं करना

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    1. वाह।बहुत खूब।
      धन्यवाद्

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  3. तेरा अक्स तैरता है, आंखों में दर्द बनकर
    तेरे लिए थे जिंदा, तेरे लिए ही मर गए
    क्‍या बात है, वाह .... बेहतरीन

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    1. प्रतिक्रिया के लिए आभार

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  4. सुंदर प्रस्तुति , आप की ये रचना चर्चामंच के लिए चुनी गई है , सोमवार दिनांक - 4 . 8 . 2014 को आपकी रचना का लिंक चर्चामंच पर होगा , कृपया पधारें धन्यवाद !

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    1. आभारी हु आशीष जी

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  5. विछोह के दर्द से बोझिल हृदयस्पर्शी रचना ! बहुत सुन्दर !

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    1. विनम्र आभार आपका

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  6. इश्क का गुबार-ए-ख्वाब था, कल था अभी नहीं है
    तुम भी कहीं थे टूटे, हम भी कहीं बिखर गए
    बेहद खूबसूरत अभिव्यक्ति

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  7. तेरा अक्स तैरता है, आंखों में दर्द बनकर
    तेरे लिए थे जिंदा, तेरे लिए ही मर गए
    बहत सुन्दर |
    : महादेव का कोप है या कुछ और ....?
    नई पोस्ट माँ है धरती !

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    1. आपकी प्रतिक्रिया के लिए आभारी हु

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  9. बहुत अच्छी पंक्तियां हैं।

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  10. समय अंततः अपने स्वजन, मित्र और हितैषियों से दूर करते हुए आखिर में स्वयं से भी दूर कर देता है. कैफ़ी आज़मी ने ये गीत लिखा था....देखी जमाने की यारी, बिछड़े सभी बारी बारी.... इन्ही दो पंक्तियों में सारा सार लिख दिया.

    सुन्दर रचना.

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    1. आपकी प्रतिक्रिया के लिए आभारी हु

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  11. तेरे साथ हमकदम थे, तेरे लिए सनम थे
    तुझसे थी मेरी हस्ती, तेरे बिना ना हम थे ..
    प्रेम में अक्सर ये होना तय है ... खुद की हस्ती भी गम हो जाती है ... सनम से ही जिंदगी हो जाती है ...

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    1. सत्य कहा आपने। आभार

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  12. दर्द ..आह ..तड़प ...अति सुंदर

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    1. प्रतिक्रिया के लिए आभारी हु

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  13. yahi sacchayi hai jeevan ki. swayam ko sambhaal lena hi behtar hai. sunderta se bhaavon ko shabd diye hain.

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    1. प्रतिक्रिया के लिए आभारी हु

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  14. दर्द है कि जाता नहीं...

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    1. सत्य कहा आपने। आभार

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    1. आपके पोस्ट का लिंक
      https://www.facebook.com/groups/605497046235414/ यहाँ भी है .... आप भी आयें

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    1. धन्यवाद् राहुल जी

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  17. तेरा अक्स तैरता है, आंखों में दर्द बनकर
    तेरे लिए थे जिंदा, तेरे लिए ही मर गए
    ...वाह...बहुत ख़ूबसूरत प्रस्तुति...

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    1. प्रतिक्रिया के लिए आभारी हु सर

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  18. खूबसूरत नज़्म स्मिता,,,

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    1. धन्यवाद् अरमान जी।

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  19. बढ़िया रचना ! मंगलकामनाएं आपकी कलम को

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    1. बहुत धन्यवाद् आपको

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  20. बहुत ही लाज़वाब रचना स्मिता जी। .


    (पैग़ाम ये हमारा कोई तो पहुँचाए तुम तक
    आँखें खुली रहेंगी इंतज़ार में मरते दम तक)

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    1. वाह।बहुत खूब।
      धन्यवाद्

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  21. बेहद उम्दा रचना और बेहतरीन प्रस्तुति के लिए आपको बहुत बहुत बधाई...
    नयी पोस्ट@जब भी सोचूँ अच्छा सोचूँ
    रक्षा बंधन की हार्दिक शुभकामनायें....

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    1. बहुत खूब।
      धन्यवाद्

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  22. आपका ब्लॉग देखकर अच्छा लगा. अंतरजाल पर हिंदी समृधि के लिए किया जा रहा आपका प्रयास सराहनीय है. कृपया अपने ब्लॉग को “ब्लॉगप्रहरी:एग्रीगेटर व हिंदी सोशल नेटवर्क” से जोड़ कर अधिक से अधिक पाठकों तक पहुचाएं. ब्लॉगप्रहरी भारत का सबसे आधुनिक और सम्पूर्ण ब्लॉग मंच है. ब्लॉगप्रहरी ब्लॉग डायरेक्टरी, माइक्रो ब्लॉग, सोशल नेटवर्क, ब्लॉग रैंकिंग, एग्रीगेटर और ब्लॉग से आमदनी की सुविधाओं के साथ एक सम्पूर्ण मंच प्रदान करता है.
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    1. प्रतिक्रिया के लिए आभारी हु

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  23. तेरा अक्स तैरता है, आंखों में दर्द बनकर
    तेरे लिए थे जिंदा, तेरे लिए ही मर गए------
    बहुत सुन्दर रचना
    मन को छूती हुई
    उत्कृष्ट प्रस्तुति
    बधाई

    आग्रह है --मेरे ब्लॉग में भी सम्मलित हों
    आजादी ------ ???

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  24. तेरा अक्स तैरता है, आंखों में दर्द बनकर
    तेरे लिए थे जिंदा, तेरे लिए ही मर गए
    सुन्दर रचना स्मिता जी

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    1. प्रतिक्रिया के लिए आभारी हु

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  25. तेरा अक्स तैरता है, आंखों में दर्द बनकर
    तेरे लिए थे जिंदा, तेरे लिए ही मर गए ।
    वाह बहुत बढ़िया गजल।

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    1. प्रतिक्रिया के लिए आभारी हु

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  26. खूबशूरत अल्फाज़ और बेहद खूबशूरत एहसास से भरी दस्ताने मोहब्बत से रूबरू कराती बेहतरीन गज़ल

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    1. प्रतिक्रिया के लिए आभारी हु

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  27. तेरे लिए ही जिन्दा थे , तेरे लिए ही मर गए !
    खूबसूरत एहसास !

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    1. प्रतिक्रिया के लिए आभारी हु

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  28. इश्क का गुबार-ए-ख्वाब था, कल था अभी नहीं है
    तुम भी कहीं थे टूटे, हम भी कहीं बिखर गए.....बहुत सुन्दर...

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    1. प्रतिक्रिया के लिए आभारी हु

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  29. इश्क का गुबार-ए-ख्वाब था, कल था अभी नहीं है
    तुम भी कहीं थे टूटे, हम भी कहीं बिखर गए
    .............बेहद खूबसूरत अभिव्यक्ति !!

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  30. बहुत सुन्दर प्रस्तुति। मेरे नए पोस्ट खामोश भावनाओं की ऊपज पर आपकी प्रतिक्रिया अपेक्षित है। शुभ रात्रि।

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  31. आपकी संवेदनशील रचना मन के भावों को दोलायमान कर गई। मेरे नए पोस्ट पर आपकी प्रतिक्रिया अपेक्षित है। शुभ रात्रि।

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    1. प्रतिक्रिया के लिए आभारी हु

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